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Prabhat Gupta

Romance

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Prabhat Gupta

Romance

वजूद

वजूद

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मेरे वजूद का और कोई इम्तिहान क्या लोगे,

जिन लबों पे मेरा नाम आया, वो निगाहें मुस्कुरा दी।


मैं रहूं या न रहूं, मेरी मौजूदगी हमेशा रहेगी,

पूछो उनसे जिसने ज़रा सी आहट पे पलकें बिछा दी।


यूं मेरी हस्ती को मिटा न पाओगे तुम कभी,

खामाखां ही तुमने मेरी सारी चिट्ठियाँ जला दी।


डूब के हर शब, रोज़ ही उभरा है 'प्रभात',

क्या हुआ जो तुमने तमाम रौशनियाँ बुझा दी।





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