STORYMIRROR

kahnu charan sahu

Abstract

3  

kahnu charan sahu

Abstract

विश्वास

विश्वास

1 min
337


विश्वास

जब कोई तोड़ता है

ना जाने क्यूं

उनसे दूर जाने को 

दिल कहता है ।


विश्वास जहां होता है

दुनिया खूब सूरत लगती है

और जहाँ नही होता है

खूब सूरत दुनिया भी

नर्क जैसी महसूस होती है। 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract