STORYMIRROR

Shubhi Saxena

Abstract

3  

Shubhi Saxena

Abstract

विद्यार्थी

विद्यार्थी

1 min
181

संसार के सबसे मूर्ख विद्यार्थी

तुम्हें प्रेम की कक्षा में मिलेंगे,


जिसकी गुरु होगी प्रकृति,

नदियां झरने हवाएं बारिशें


जिसका सबसे उद्दंड बालक

उनका ईश्वर ही होगा,


जिसे अवकाश ना जन्म से पहले

ना मृत्यु के बाद मिला होगा।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Shubhi Saxena

Similar hindi poem from Abstract