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Hari Ram Yadav

Inspirational

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Hari Ram Yadav

Inspirational

वह देश रसातल में जाता

वह देश रसातल में जाता

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जिसने न देखी हो सीमा, 

  न देखी हो सीमा की बाधा।

ऐसे नेता अफसर क्या जाने,

  एक सैनिक की मर्यादा।

जो लड़ा देश की सीमा पर,

  जिसने अपना जीवन वार दिया।

किया देश की केवल चिंता,

  हमको घरों में त्यौहार दिया।

हम निश्चिंत घरों में अपने सोते ,

  क्योंकि सीमा पर जगे जवान,

दुश्मन का सीना छलनी करते,

  अपना छत्तीस इंची सीना तान।

एक सिपाही को वह क्या जाने,

  जो सोते ए सी कमरों में ।

उसकी मुश्किल कितनी होगी,

  नहीं पता चलेगा बैठे नगरों में।

ऐसे वीरों को देना सम्मान,

  करना चिंता, फर्ज हमारा है।

हम तो खुद तक हैं सीमित,

  पर उनका तो देश सारा है।

समय नहीं का न करें बहाना,

  उनकी समस्या पहले हल करें।

आज काम थे जो करने वाले,

  उसको चाहे तो कल करें ।

वीर शहीद हुआ जो सीमा पर,

  जाकर घर उसके शीश झुकाना है।

काम बड़ा है न इससे जग में कोई,

  समय नहीं का, गाना न गाना है।

जगो देश की सोती नौकरशाही,

  जगो देश के दल दल के कप्तान।

 वह देश रसातल में है जाता,

  जो न देता अपने सैनिक को सम्मान।


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