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वैष्णव चेतन "चिंगारी"

Tragedy

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वैष्णव चेतन "चिंगारी"

Tragedy

वेलेंटाइन डे तो याद रहा ( 46 )

वेलेंटाइन डे तो याद रहा ( 46 )

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आज सबको वेलेंटाइन-डे तो याद रहा,

पर पुलवामा में जो शहीद हुए उनको युवा भूल रहा,

अरे हम तो पूरब वाले है अपनी परंपरा पर चलते रहो,

जो चीज हमारी नहीं उसको क्यों अंगीकार कर रहे हो,

पश्चिम की सभ्यता को अपना कर

क्यों अपने संस्कार तुम भूल रहे हो?

आज के युवा-यवतियाँ इस वतन के

चमन के गुलाब हो,

तुम जिस वतन में महक रहे हो

वो उनकी ही बदौलत हो,

सजग सिमा प्रहरी के सतर्कता से ही

हम सब सुरक्षित यहाँ,

हम तीज-त्यौहार जो भी मनाते है

वो सब वतन के सुरक्षा प्रहरियों से है,

आज के ही दिन देकर अपनी

जान वतन के खातिर,

वो तो अमर-योद्धा हो गए

उनको ही बिसरा डाला आखिर,

उनके भी सपने थे उनके भी अपने थे,

लेकिन वतन के खातिर वो चल पड़े थे,

आज के ही दिन इनकी भी प्रेमिकाएँ

पत्नियां राह देखे बैठी हो होंगी,

राह उनकी भी

वो अपने-अपने घरों से देख रही होंगी,

वो वतन की सीमा से सीधे स्वर्ग को चले गए,

वो भी घर से निकले होंगे

बड़े-बुजुर्ग के आशीर्वाद लिए,

शायद उनको

पता भी न होगा देश में छुपे गद्दारों का,

जो दुश्मनों से मिलकर

घात उन पर करने का सोचा था,

निहत्ते-निद्रा में थे

नहीं उन्होंने कोई हथियार चलाए थे,

कुछ अपनो के मिलीभगत से

विश्वासघात हुआ था !!


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