✍🏻 समर्पित ✍🏻
✍🏻 समर्पित ✍🏻
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ये मेरे चंद अल्फ़ाज़ है
उन मुसाफिरों के नाम,
जो कभी मिले थे
मुझे राहों में
अजनबियों की तरह,
और......
अपना बनाकर चल दिये,
..........सफरे हयात इस
कदर तबील
और.......
जाना मजार तक.........!!
