✍🏻 समर्पित ✍🏻
✍🏻 समर्पित ✍🏻
1 min
178
ये मेरे चंद अल्फ़ाज़ है
उन मुसाफिरों के नाम,
जो कभी मिले थे
मुझे राहों में
अजनबियों की तरह,
और......
अपना बनाकर चल दिये,
..........सफरे हयात इस
कदर तबील
और.......
जाना मजार तक.........!!
