उत्सव
उत्सव
मैंंने हर दिन
जीवनोत्सव मनाने की
ठान ली है।
मुझे इस बात का
कतई मलाल नहीं
कि मैंने इस बेशक़ीमती जीवन में
क्या संजोया और क्या खोया ।
मैंने तो बेफिक्र
जीने की ठान ली है...।
न तो मेरे पास है
कोई आलिशान बंगला,
न ही गाड़ी-मोटर;
न तो मेरा है अच्छा बैंक-बैलेंस और
न ही पुश्तैनी दौलत...
मैं तो हूँ पूरा घुमक्कड़ !
कलम की धार पे
चलता है मेरा जीवन...
मैं तो बस
बेफिक्र लिखता जाता हूँ...।
हाँ, मैं जीवनोत्सव मनाता हूँ!
