मैं
मैं
मैं अपने कर्मपथ पर
कितना सफल या असफल हूँ,
वो तो आनेवाला वक़्त ही बताएगा...।
मुझको अपने जीवनकाल में
क्या हासिल हुआ, क्या नहीं :
वो भी मेरा विचार्य विषय नहीं...!
किसने मेरे कर्मों का
कैसे निरुपण किया,
वो भी मुझको जानना ज़रूरी नहीं...
मैं तो बस एक बात का
विशेष ध्यान रखता हूँ
कि किसने मुझ पर
भरोसा किया और मुझे
क्या दायित्व पालन करने का
निर्देश दिया...!
एक बार मैंने जो
खुद से प्रतिबद्धता की,
वो मैं पूरा करके ही
दम लेता हूँ!
मैं ऐसा ही हूँ...!!!
मेरे हालात
कभी मेरी
अंदरूनी हालत को
बदल नहीं सकता...!!!
मैं जैसा हूँ,
वही मेरा परिचय है...
चाहे कोई मुझे
अपना प्रियपात्र बनाये
या नहीं तो पथ का
कंटक माने --
ये उन लोगों का
विचार्य विषय है,
मेरा उससे कोई
लेनादेना नहीं...!
मैं जो भी कहूँगा,
अपने बालबूते पर कहूँगा :
स्वार्थसिद्ध-सुविधावादी
बैसाखियों का सहारा लेने की
मेरी आदत नहीं...!
