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सुरशक्ति गुप्ता

Abstract

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सुरशक्ति गुप्ता

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उलझनें

उलझनें

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ए जिन्द़गी क्या शिकवा करूं तुझसे


अपनी ही उलझनों में उलझ सी गई हूं।


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