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chandraprabha kumar

Inspirational

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chandraprabha kumar

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उद्योग से सब संभव

उद्योग से सब संभव

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कमनीय कान्ति चंद्रमा में

प्रचंड प्रभा मिलती सूर्य में,

उद्योग से सब कुछ संभव

निराश न हों प्राणी भव में। 


सुख का झरना जो बहता दिल में 

रुकावट से आता क्रोध उसमें,

क्रोध आने पर कुछ नहीं सूझता 

क्रोध होता सब पाप के मूल में।


क्रोध ज्वलनात्मिका वृत्ति है

क्रोध से सम्मोह होता है,

सम्मोह से स्मृति भ्रंश हो जाता 

स्मृति भ्रंश से बुद्धि नाश हो जाता।


भगवान प्रसन्न होते हैं तो

कृपा कर बुद्धि योग दे देते हैं ,

बुद्धि डांवांडोल नहीं होती 

दृढ़ निश्चय पर अडिग रहती है ।


ध्यान की महिमा भारी है

ध्यान से प्रभु में चित्त लीन होता है,

सारे योग का उपयोग यही है

ध्यान से सही उद्योग संभव है। 


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