त्योहारों की चमक और छुपी कहानियाँ
त्योहारों की चमक और छुपी कहानियाँ
जब जगमग दीपों से सजे हों रास्ते,
ढोल की थाप पर नाचते हों लोग हँसते,
तभी कहीं कोनों में छुपे कुछ स्वर,
कहते हैं अपनी कहानी, मगर कोई न सुनता उधर।
त्योहारों पर पुलिस की चौकसी जब बढ़ती है,
हर मोड़ पर सायरन की गूंज गहराती है।
पर इन छापों के पीछे छिपी जो सच्चाई है,
वो कुछ टूटी ज़िंदगियों की रुलाई है।
किसी ने छोड़ा घर, किसी ने खोया नाम,
किसी की मजबूरी, किसी का था अंजाम।
सपनों की राह में भटक गई दिशा,
कभी नशे ने बाँधा, कभी छल ने दिया दगा।
इन लड़कियों की आँखों में भी थी रौशनी,
पर हालातों ने कर दी सबकी जीवन-कथनी।
कुछ ने चाहा सम्मान, कुछ ने चाहा आसमान,
पर बिखर गए कदम, खो गई पहचान।
पुलिस के प्रयास जरूरी हैं सही राह के लिए,
पर संवेदना भी उतनी ही हो न्याय के लिए।
त्योहारों में ही नहीं, हर दिन हो निगरानी,
तभी सुरक्षित होगी हर नारी की कहानी।
समाज को चाहिए न केवल निर्णय की दृष्टि,
बल्कि समझ और करुणा की सच्ची सृष्टि।
हर गिरी हुई आत्मा में भी है एक चिंगारी,
बस चाहिए साथ, विश्वास और तैयारी।
जब कोई लड़की फिर से मुस्कुराएगी,
तो दीपावली की लौ और उजियाली छाएगी।
और तभी कहलाएगा सच में महान,
वो समाज जहाँ नारी का हो सम्मान.....D.T
लेखक : देवाशीष तिवारी ✍️
