STORYMIRROR

Pranav Prakash

Abstract

3  

Pranav Prakash

Abstract

तू नहीं तो मोहब्बत कैसी

तू नहीं तो मोहब्बत कैसी

1 min
248

मैं अपने इश्क की फिर हर रवायत खत्म कर दूँगा,

मैं खुद रूठूँगा और फिर खुद शिकायत खत्म कर दूँगा!

मैं तेरी आँखों में खुद ही तलाश लूँगा मोहब्बत,

और फिर खुद को तेरा होने से पाबंद कर दूँगा!


मेरे होने ना होने से जब कोई फर्क ना तुझको,

मैं फिर क्यूँ हूँ यहाँ मैं खुद का होना बंद कर दूँगा!

कोई होती नहीं वजह नहीं याद तू आये,

मैं तुझे भूलना अबके बारी बंद कर दूँगा!

और क्या होगा यही होगा अब ऐसा लगता है,

मैं मर जाऊँगा और फिर ये मोहब्बत खत्म कर दूंगा!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract