तुम्हें क्या पता?
तुम्हें क्या पता?
तुम्हें क्या पता कि इन गरीबों की दिक्कतें क्या-क्या होतीं हैं ।
महसूस करके देखों उनकी आंखों में जिंदगियाँ जहां रोतीं हैं ।।2।।
मत भूलाओ उनकी कुर्बानियों को ऐ पैसे वाले अमीर इंसानों ।
उनकी ही वजह से तुम्हारी जिंदगियाँ हर रात सुकूं से यहाँ सोतीं हैं ।।3।।
यह आजमाइश है उनकी कि तू उनसे कुछ भी करा ले यहाँ ।
बदलेगा नसीब उनका भी क्योंकि उनकी मांयें दुआ में रोतीं हैं ।।4।।
दिलों को तोड़कर पा लेता है तू इस दुनिया में तो सब कुछ ।
सोचना कभी तुम्हारी खातिर इनकी जिंदगियाँ क्या क्या खोतीं हैं ।।5।।
है आसान बहुत किसी की भी आंखों में यूँ आंसू ले आना ।
तुम्हें क्या पता एक रोते हुए बच्चे की हंसी में खुशी क्या होती है ।।6।।
मतलब की है यह दुनिया तू पहचान यहां अपने परायों को ।
यह आंखें हैं एक मां की जो अपने बच्चों के लिए सदा रोतीं हैं ।।7।।
मैंने देखा है कई जिंदगियों को यहां से वहाँ शहर-शहर भटकते हुए ।
कोई तो पूछ लो उन गरीबों से कि दौलत की कमी क्या होती है ।।8।।
