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ज्योत्स्ना कपिल

Romance

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ज्योत्स्ना कपिल

Romance

तुम

तुम

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तुम थे तो जीवन जैसे,

इक सुरीला गीत था,

तुम थे तो चहुँओर,

बजता जैसे संगीत था।


तुम थे तो अंतर्मन में,

गूँजता जलतरंग था,

तुम थे तो पतझर भी,

लगता बसंत था।


तुम थे तो ये जहाँ,

रजनीगंधा सा महकता था,

तुम थे तो हर इक कण,

खुशी से चहकता था।


तुम थेे तो मावस भी थी,

दुग्ध धवल चाँदनी,

तुम थे तो पीड़ा में भी,

थी इक अनोखी रागिनी।


जब तुम नहीं तो कुुछ नहीं,

है अब मेरी ज़िंदगी में,

तुम नहीं तो कोई आस,

भी नहीं है ज़िंदगी में।


तुम नहीं तो हर आसान,

दाँव भी मैं हारती हूँ,

तुम नहीं तो इक पल भी,

जीना नहीं चाहती हूँ।


तुम नहीं तो ज़िंदगी में,

आता नहीं कोई मज़ा,

तुम नहीं तो ज़िंदगी भी,

बन गई है इक सज़ा।


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