Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Pankaj यायावर

Romance

4.6  

Pankaj यायावर

Romance

तुम ही थे

तुम ही थे

1 min
87


मधुबन में उस मधुर रात में

साथ हमारे तुम ही थे

हम तो थे पूरे दीवाने 

कुछ मस्ताने तुम भी थे।


में तो इक मयकश था लेकिन

मेरे साकी तुम ही थे

होंटो तक मय आयी क्यूंकि

मेरे प्याले तुम ही थे। 

  

ग्रीष्म रात्रि में भीनी भीनी

महकी बेला तुम ही थे

जाड़ों की वो मीठी मीठी

नर्म दुपहरी तुम ही थे।


अलसायी पलकों में आये

स्वपन सुहाने तुम ही थे

कठिन समय मे व्यथित हृदय को

राह दिखाई तुम ही थे।


छुटपन की वो अल्हड़ मस्ती

खेल तमाशा तुम ही थे

यौवन में जो जग कर काटीं

लम्बी रातें तुम ही थे।


तेरा आना ऋतु सावन की 

जाना पतझड़ तुम ही थे

तेरी यादों में जो बरसे

काले बादल तुम ही थे।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance