तो क्या हुआ
तो क्या हुआ
तो क्या हुआ !
अगर उसकी मुस्कुराहत
तुम्हारी तन्हाई से लिपटकर
खुद को मुस्कुराना सिखाती है ,
यारा, यही तो होता है
जब जिंदगी मैं कोई
अपना सा लगता है।
तो क्या हुआ !
अगर उसका मिलना
तुम्हारे हाथ की लकीरों में नही है
फिर भी बेफिक्र होकर
सारी लकीरे
उसी के सामने रखते हो ना,
यारा, यही तो होता है
जब जिंदगी मैं कोई
अपना सा लगता है।
तो क्या हुआ !
अगर उसका दर्द
आपकी रातों की नींद का
एक हिस्सा बन कर
तकियों के पीछे छुप जाता है,
यारा, यही तो होता है
जब जिंदगी मैं कोई
अपना से लगता है।
तो क्या हुआ !
अगर उसकी हर बात का जिक्र
अपने दोस्तों के सामने
कुछ इस तरह से करते हो,
जैसे कि वो सिर्फ तुम्हारा ही है,
यारा, यही तो होता है
जब जिंदगी मैं कोई
अपना से लगता है।
तो क्या हुआ !
अगर आज भी उसी उम्मीद पर
जी रहे हो कि काश वो
हमारे हर रास्ते की एक मंजिल बने
और हम उस मंजिल को चूम ले,
यारा, यही तो होता है
जब जिंदगी मैं कोई
अपना सा लगता है।।

