STORYMIRROR

Ankit Raj

Abstract

3  

Ankit Raj

Abstract

तेरी सिसकियाँ

तेरी सिसकियाँ

1 min
417

तेरी ये जो सिसकियाँ हैं

अब मुझे भी सुनाई देती हैं

तुम बैठी तन्हा मायूस हो

तेरी तन्हाई महसूस होती है


तेरे नयन आश्रु से भरे हुए हैं

मुझको भी अश्रु से भींगा रही

दूर हो कर हमसे तुम तो

फिर भी तस्वीर देख निहार रही


तू सितारों में तन्हा चाँद अकेली

मैं भी बादल बन भटक रहा हूँ

तेरी ओठों से मुस्कान चली गई

तेरे बिन मैं भी बिखर रहा हूँ


तुम भी रह रही हो तन्हा

तेरे बिन मैं भी अकेला हूँ

तेरे बिन बागों में रौनक नहीं

अब तेरा इंतजार कर रहा हूँ


नई किरणें फिर से खिलेंगी

फिर से नया सवेरा लायेंगी

ये वक्त जो ठीक नहीं चल रहा

फिर से नई शुरुआत कर पायेंगे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract