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Aarti Sirsat

Abstract

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Aarti Sirsat

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तेरी दिवानी

तेरी दिवानी

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ओरे मोहन मै तो तोरे

सावने रंग में रंग गई...

तोसे कैसे कहूँ तुझ में

मैं बस गई...


हृदय के रोम रोम में

बस अब तुम्हारा ही 

बसेरा है, मै तो न जाने

कब कि तेरी हो गई...


दिवानी है राधा तेरी,

राधा की दीवानी है 

ये दुनिया सारी, मै तो

खुद को तुम पर हार गई...


मनमोहन तेरी बंसी पुकारे

बस राधा का नाम, 

फिर क्यों मैं तेरी

दिवानी बन गई!

   


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