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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

तेरा ही सहारा

तेरा ही सहारा

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हर आँख में हमने तो समंदर पाल रखा है

अपनों के जख्मों को बड़ा संभाल रखा है

कोई तो ज़माने मे सच्चा रिश्तेदार होगा,

इसी उम्मीद में तो खुद को जिंदा रखा है


पर हमारी उम्मीद शीशे की तरह टूट गई,

हमने भी शीशे का क्या घर बना रखा है

हर तरफ के शोर में, हम तो चुप हो गये है,

हमने तो खुद से भी बोलना बंद कर रखा है


अब बालाजी जग में सिर्फ़ तेरा सहारा है,

हर तरफ से हो गया है ये साखी बेचारा है,

हाथ थाम भी ले, हे कृपानिधान,दयासिंधु

तेरे ही दम से अब तक सांस चला रखा है



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