STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

3  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

तेरा ही सहारा

तेरा ही सहारा

1 min
41

हर आँख में हमने तो समंदर पाल रखा है

अपनों के जख्मों को बड़ा संभाल रखा है

कोई तो ज़माने मे सच्चा रिश्तेदार होगा,

इसी उम्मीद में तो खुद को जिंदा रखा है


पर हमारी उम्मीद शीशे की तरह टूट गई,

हमने भी शीशे का क्या घर बना रखा है

हर तरफ के शोर में, हम तो चुप हो गये है,

हमने तो खुद से भी बोलना बंद कर रखा है


अब बालाजी जग में सिर्फ़ तेरा सहारा है,

हर तरफ से हो गया है ये साखी बेचारा है,

हाथ थाम भी ले, हे कृपानिधान,दयासिंधु

तेरे ही दम से अब तक सांस चला रखा है



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy