तारीफ
तारीफ
उनकी आँखें,
कोहिनूर का हिरा,
उनके ओठ,
बगीचे का फूल ,
हुस्न की, तारीफ के लिये,
बाते भी कम थी,
क्युकी हम पागल ही ऐसे हुये,
जैसे मंदिर के, बाहर की चप्पल थी...
उनकी आँखें,
कोहिनूर का हिरा,
उनके ओठ,
बगीचे का फूल ,
हुस्न की, तारीफ के लिये,
बाते भी कम थी,
क्युकी हम पागल ही ऐसे हुये,
जैसे मंदिर के, बाहर की चप्पल थी...