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Sanjay Jain

Inspirational

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Sanjay Jain

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सुंदरता की परिभाषा

सुंदरता की परिभाषा

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नहीं होती सुंदरता

किसी के भी शरीर में।

ये बस भ्रम है

अपने अपने मन का।


यदि होता शरीर सुंदर

तो कृष्ण तो सांवले थे।

पर फिर भी वो सभी की

आंखों के तारे थे।


क्योंकि सुंदर होते है

उसके कर्म और विचार में।

तभी तो लोग उसके प्रति

आकर्षित होकर आते है।


वह अपनी वाणी व्यवहार

और चरित्र से जाना जाता है।

तभी तो लोग उसे

अपना आदर्श बना लेते हैं।


जो अर्जित किया उसने

अपने गुरुओं से ज्ञान।

वही ज्ञान को वो

सुनता है दुनिया को।


जिससे होता है एक

सभ्य समाज का निर्माण।

फिर हर शख्स को ये दुनिया,

सुंदर लगाने लगती है।


इसलिए संजय कहता है,

जमाने के लोगों से।

शरीर सुंदर नहीं होता

सुंदर होते हैं उसके संस्कार।


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