STORYMIRROR

Aarti Ayachit

Abstract

3  

Aarti Ayachit

Abstract

सुहागन

सुहागन

1 min
298

पिया तोसे

कैसे कहूं मैं

मन की बात।


साथ तेरे जिंदगी

की धूप-छांव में

बह रही हूं मैं।


करती हूं सदा

तेरी ही बंदगी

मैं यह काफी

नहीं है।


हर सुख-दुख में

साथ चलूँ तेरे

यही है मेरी भावना।


श्रृंगार करूं ना मैं

ना पहनूं कोई साज

सादा जीवन

उच्च विचार

निभा रही हूं आज।


चुड़ी कुमकुम

मेहंदी गहने पहन

ओढ़े चुनरी लाल

ही क्या मैं सुहागन

कहलाऊं।


करती हूं दुआ

परिवार में सबकी

सलामती की

खुशहाल व स्वस्थ

जीवन की

क्या ये सुहागन 

कहलाने के

काबिल नहीं है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract