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स्त्री

स्त्री

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बँधा है उनका आकाश

बँधी है उनकी ज़मीन

वर्जनाओं के शहर में

नपी-तुली हवाओं से

जीने वाली औरतें

आकाश को ठेलकर अपनी

जगह बनाती हैं और

अपने गगन का सूर्य

बन जाती हैं।


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