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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

सरहद यादों की।

सरहद यादों की।

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ये मुल्क़ो की नहीं सरहद यादों की है तेरी,

जो बंटे नहीं ये वो सरहद यादों की है तेरी।


आख़िरी रस्म चल रही है हमारी यादों की, 

याद तो करते हैं पर अब बातें नहीं प्यार की।


गुज़रे वो ख़ूबसूरत लम्हें जो बीते साथ तेरे, 

यादें रूक गई लगा जो अवरोध राह में मेरे।


हदें तय नहीं होती मोहब्बत करने वालों की, 

कद्र होती नहीं है मोहब्बत करने वालों की।


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