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Randhir Kumar

Abstract

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Randhir Kumar

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सपने बेचता हूँ

सपने बेचता हूँ

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सपने बेचता हूँ

पर खरीद नही पाओगे...

मेरे बस्ती में खो जाओगे,

तुम क्यों इधर आओगे!...

एक तरफ रेत,एक तरफ समंदर

बोलो ..कहाँ तक टिक पाओगे?..


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