STORYMIRROR

आकांक्षा राजीव

Romance

2  

आकांक्षा राजीव

Romance

सफर यही तक है

सफर यही तक है

1 min
263

मैं रहूँ ना रहूँ फिर भी तुझे चलना होगा

ज़िन्दगी का सफर तय करना होगा


तुझे सूरज की किरणों सा चमकना है

मेरी यादों को संजोकर मत रखना

एक भूल थी मैं


ये खुद को समझा लेना

मैं दुनिया में ना रहूँ

तो थाम लेना किसी और का हाथ


कभी उदास ना होना

मैं तो हूँ तेरे बहुत पास

दिल में रहने का हक तो बस है मेरे पास



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance