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Sudhir Srivastava

Abstract

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संत रविदास जयंती

संत रविदास जयंती

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संत रविदास जयंती गोवर्धनपुर, वाराणसी में जन्मे भक्ति आंदोलन के संत रैदास, पिता संतोख दास, माता कर्मा देवी की संतान, चर्मकार परिवार में जन्म लिए महान कवि, समाज सुधारक जाति-पाति, छुआछूत के विरोधी रहे। निर्गुण ईश्वर भक्ति संदेश फैलाया उनके आदर्श वाक्य-भाव 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' को आज भी सम्मान दिया जाता है। बाल्यावस्था से ही भावुक और ईश्वर भक्त रैदास अपने पुश्तैनी चमड़े के कर्म में रमे रहे, संत रामानंद के शिष्य, कबीर के समकक्ष थे। जीवन भर समाज को मानवता, एकता का पाठ पढ़ाते रहे, 'गुरु ग्रंथ साहिब' में शामिल उनके रचित पद आज भी अमर हो दिल को छूते आ रहे, मीराबाई के गुरु रैदास ने कर्म को प्रधान माना दलित समाज में चेतना ज्योति जगाते रहे। अपना जीवन समाज की सेवा के नाम किया, और अंत में भी ईश्वर का नाम जाप करते हुए भौतिक शरीर का परित्याग किया। कबीर, सूर, तुलसी की परंपरा के संत कवि रैदास जी को आज भी हम श्रद्धा भाव से याद कर रहे हैं उनके विचारों, संदेशों का अनुसरण कर रहे हैं महान संत, कवि को बारंबार नमन वंदन कर अपने श्रद्धा पुष्प अर्पित कर रहे हैं। सुधीर श्रीवास्तव


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