संदेश
संदेश
लड़का होने पर बांटी मिठाई,
लड़की होने पर आंसुओं की नदियां बहाई।
भगवान यह कैसी है रीत बनाई,
लड़की की कोख में ही करवा दी गई सफाई।
बाबुल तू किस बात से डरता है,
क्यों अपने पग सोच सोचकर रखता है।
हो सकता है बाबुल मैं भी अपने भाई के जैसे,
एक दिन इस जग में तेरा नाम चमकाऊं।
कल्पना या सुनीता बनकर,
एक दिन अंतरिक्ष की सैर पर जाऊं।
अपने पैरों पर खड़ी होकर,
दहेज जैसी कुप्रथा को जड़ से मिटाऊं।
अपने देश की सेवा करके,
जग में तेरा नाम चमकाऊं।
एक अच्छी पत्नी बनकर,
बाद में अच्छी मां कहलाऊं।
खोखले हो रहे समाज को,
इस गंदगी से मुक्ति दिलवाऊं।
किरण बेदी के जैसे बहादुर बनकर,
कुरीतियों को मैं दूर भगाऊं।
यह तभी हो सकता है,
अगर मैं इस संसार में आ पाऊं।
बाबुल मुझे भी संसार में आने दो,
और अपने देश का गौरव बढ़ाकर
यह संदेश जग में फैलाने दो।
