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Uma Pathak

Abstract

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Uma Pathak

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समुद्र की लहरें

समुद्र की लहरें

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समुंदर की लहरें कुछ तो बताती है

बिना कहे चुपचाप वापस चली जाती है

बस हमारे समझ कुछ नहीं आता

वह अनजाने में ही सही बहुत कुछ कह जाती है।


समुंदर की लहरों में वह गहराई है

इसमें ना कोई चतुराई है

जब भी हवाई चली लहरों ने उछाल मारी

हौले हौले अपनी बात कह डाली।


लहरों ने चारों ओर जाकर देखा

हर कोने में मिला मक्सत अनोखा

जब लहरें क्रोध में आई

उन्होंने अपनी लहरें तेज बढ़ाई।


कोई उन्हें नहीं समझ पाया

उसने हर घटती बढ़ती लहर की कहानी सुनाई

समंदर की रेत में हमने एक कहानी बनाई

लहरों ने आकर उसे मिटाई।


लहरों की बराबरी आज तक कोई नहीं कर पाया

जिसने भी कोशिश की लहरों ने अपनी संग भगाया

समंदर की लहरें अंतर कराती हैं

लहरें बीच में जितनी भी गहरी हो

आगे जाकर समान हो जाती है।


लहरों की अहमियत किसी को समझ नहीं आती है।


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