STORYMIRROR

Kanchan Arvind

Inspirational

3  

Kanchan Arvind

Inspirational

सक्षम

सक्षम

1 min
196

मुझे अक्षम कहने वालों

कभी क्या तुम हो सकोगे

इतने सफल और सक्षम

क्या तोड़ सकोगे जंजीरें

मन की क्या ला सकते

गौरव और मान देश का

सक्षमता शरीर की क्या

रखती मायने जो हों मन

मात्र से विकलांग, जो औरों को

करें प्रताड़ित, उड़ाएँ हास

लें प्रण की हम बने सहारे

ऐसी दुनिया क्यों न बनाएँ

जहाँ मिले कड़ियों से कड़ियाँ

हो रहे तन मन धन से

माँ भारती के सच्चे सपूत

बनें सभी जन सहिष्णु

कि अक्षमता है बहुत बुरी

हो तन कि चाहे हो मन की

तन की तो है दिख भी जाए

पर मन की हो तो राम बचाए



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational