Surendra kumar singh
Drama
छोटी छोटी बचत की सीख तो
हमें बहुत से प्राणी देते रहते हैं
हमने उनसे सीखा भी
यूँ बचाते रहने का सन्देश
अपनी भविष्य की
सुरक्षा की खातिर
मानसिक स्वतंत्रता के खातिर।
संवाद 3
एक पल
तुम्हारे आगोश...
चलते चलते
तुम्हारा होना
एहसास
आज
चलो
सुबह है
लोगों की खुशी में खुशी मेरा व्यवहार हैं तू जानती हैं माँ तेरा बेटा बॉर्डर का पहरेदार लोगों की खुशी में खुशी मेरा व्यवहार हैं तू जानती हैं माँ तेरा बेटा बॉर्डर का...
जैसे हैं आप अच्छे हैं आप अपने जैसा बने मत हो जाए इतना ही बहुत है। जैसे हैं आप अच्छे हैं आप अपने जैसा बने मत हो जाए इतना ही बहुत है।
सक्षम सबल हिंदी वैज्ञानिक ना भारत तक विरमित हो ! सक्षम सबल हिंदी वैज्ञानिक ना भारत तक विरमित हो !
यम को कंपाने वाले ये शब्द आज उसी की गोद में सो गया। यम को कंपाने वाले ये शब्द आज उसी की गोद में सो गया।
तो इसे लिख भी लेता हूँ, तुम पढ़ कर बताना, के मैं कैसा लिखता हूँ। तो इसे लिख भी लेता हूँ, तुम पढ़ कर बताना, के मैं कैसा लिखता हूँ।
किसी और दिन तुम देना मुझे धमकी चाँद रौशन हुआ तुम खोलो तो खिड़की। किसी और दिन तुम देना मुझे धमकी चाँद रौशन हुआ तुम खोलो तो खिड़की।
वे उसकी जान बचा सकते थे, सभी महिलाओं को एक बेहतर जीवन दे सकते थे। वे उसकी जान बचा सकते थे, सभी महिलाओं को एक बेहतर जीवन दे सकते थे।
द्वेष राग की अग्नि में जल कर, जिजीविषा लाचार हो गयी ! द्वेष राग की अग्नि में जल कर, जिजीविषा लाचार हो गयी !
उन खुशियों पर अपना हक अदा करके दिमाग को फसलों के जैसे पानी में डूबा के चला जाता है। उन खुशियों पर अपना हक अदा करके दिमाग को फसलों के जैसे पानी में डूबा के चला ज...
वाह रे मेरा आधुनिक भारत ये तो सच में, मेरे देश को बदल रहे हैं। वाह रे मेरा आधुनिक भारत ये तो सच में, मेरे देश को बदल रहे हैं।
चलते चलते जब काँटे चुभे तो लहुओं पर ना तकते हैं बस चलते हैं बस चलते हैं। चलते चलते जब काँटे चुभे तो लहुओं पर ना तकते हैं बस चलते हैं बस चलते हैं।
हम सारे ही खिलौने हैं, और अपना एक कोना है। हम सारे ही खिलौने हैं, और अपना एक कोना है।
बहुरंगी हों रंग तभी संसार नयन को भी भाए।। बहुरंगी हों रंग तभी संसार नयन को भी भाए।।
तुम्हारा प्यार मेरे लिए ज्यादा है। या कही मुझे मरने का इरादा है। तुम्हारा प्यार मेरे लिए ज्यादा है। या कही मुझे मरने का इरादा है।
चलो आओ करे फिर एक पहल रिश्तों के सम्मान की पहल करे दादा - दादी के नाम की। चलो आओ करे फिर एक पहल रिश्तों के सम्मान की पहल करे दादा - दादी के नाम की।
उठा लिया जब व्रत उद्धार का ले आऊंगी संसार में प्रलय भी। उठा लिया जब व्रत उद्धार का ले आऊंगी संसार में प्रलय भी।
इतना आसान है क्या सच में, इतना आसान है क्या ? इतना आसान है क्या सच में, इतना आसान है क्या ?
जीने की ख़्वाहिश मैं तिनका-तिनका मर रही हूँ मैं। तिनका-तिनका मर रही हूँ मैं। जीने की ख़्वाहिश मैं तिनका-तिनका मर रही हूँ मैं। तिनका-तिनका मर रही हूँ मैं।
भौतिक शांति हेतु विध्वंस हो रही है प्रकृति की सुंदर रचना। भौतिक शांति हेतु विध्वंस हो रही है प्रकृति की सुंदर रचना।
जाने क्यूँ है ये अन्धेरा ना हो कभी तू जुदा ना हो कभी तू खफा। जाने क्यूँ है ये अन्धेरा ना हो कभी तू जुदा ना हो कभी तू खफा।