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Mahavir Uttranchali

Abstract


4.9  

Mahavir Uttranchali

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श्री महावीर हनुमत चालीसा

श्री महावीर हनुमत चालीसा

2 mins 42 2 mins 42

दोहे :


हे हनुमत, हे विश्व गुरु, प्रभु भक्त महावीर

उत्तम फल वाको मिले, जो सुमिरे रघुवीर //1.//


बिसरायें दुष्कर्म को, हम तुच्छ बुद्धिहीन

हे बलधामा भक्त को, न रखिए दीन हीन //2.//


चौपाई :


हे कपीस करुणा की मूरत

सब से न्यारी तेरी सूरत //1.//


भक्त अनोखे तुम रघुवर के

काज किये सब जी भर भर के //2.//


हो बलशाली अंजनी नन्दन

करता यह जग तेरा वन्दन //3.//


हो पवन पुत्र आप अनूठे

आपसे कोई सन्त न रूठे //4.//


युग सहस्त्र योजन की दूरी

पलक झपक कर डाली पूरी //5.//


तेज प्रताप ऐसा निराला

सूरज का कर लिया निवाला //6.//


नाम सुनी सब कांपे बैरी

शनि की दृष्टि न तुमपे ठहरी //7.//


शोभित घुंघराले केशों में

रहें छिपकर साधु वेशों में //8.//


कंचन काया, छवि निर्मल है

हाथों में ज्यों गंगा जल है //9.//


हनुमत का बल बज्र समाना

सम्मुख शत्रु तनिक ना आना //10.//


कांधे उन के सजा जनेऊ

राम लखन-सा करते नेहू //11.//


रामचरित कंठस्त उन्हें है

पल पल प्रभु की याद जिन्हें है //12.//


जो बजरंग बली को जपते

जन्म-जन्म के संकट मिटते //13.//


हनुमत नाम को कम न आंके

भूत पिचाश निकट ना झाँके //14.//


महाबली हो, बाहुबली हो

जग में एक बजरंग बली हो //15.//


ज्ञानी तुम, विज्ञानी तुम हो

राम भक्ति के दानी तुम हो //16.//


उत्तम हर व्यवहार किये हो

रामभक्ति को अर्थ दिये हो //17.//


लघु रूप में सिया ने देखा

मिटी विषाद की तभी रेखा //18.//


बजा हनुमत नाम का डंका

पूँछ जली तो फूंकी लंका //19.//


दुष्ट असुर इक-इक कर तारे

खलनायक रावण के प्यारे //20.//


माता का सन्देशा लाये

राम लखन दोनों हर्षाये //21.//


हे हनुमत तुम प्यारे ऐसे

भाई भरत दुलारे जैसे //22.//


प्रभु सेवक ऐसा ना दूजा

जिसकी सब करते हों पूजा //23.//


भक्तों में है नाम तिहारा

दीन दुःखी का आप सहारा //24.//


दिगपाल करें पल-पल वन्दन

देवी, देव करें अभिनन्दन //25.//


यम, कुबेर हैं भक्त तुम्हारे

ऋषि-मुनि भी आरती उतारे //26.//


राम मिले तो बाली तारा

यूँ सुग्रीवहिं काज सँवारा //27.//


शरणागत को मित्र बनाये

काम प्रभु के विभीषण आये //28.//


जब जीता प्रभु ने भीषण रण

लंकापति बने, प्रिय विभीषण //29.//


क्षणभर में ही लांघा सागर

रामशक्ति को किया उजागर //30.//


कठिन सभी के काज सँवारे

राम दया की दृष्टि सहारे //31.//


बल दो हमको हे बलशाली

अर्ज आपसे जाय न टाली //32.//


भक्तों के रक्षक बजरंगी

दुष्टों के भक्षक बजरंगी //33.//


शत्रु आगे टिके ना कोई

इनका तेज सहे ना कोई //34.//


तुमसा नाथ कोई न दूजा

सकल विश्व में तेरी पूजा //35.//


राम भक्तों पे कृपा तेरी

कही न जाये महिमा तेरी //36.//


अष्ट सिद्धि नौ निधि के स्वामी

महाबली तुम, अन्तर्यामी //37.//


हर संकट से आप बचाएँ

भक्तों के सब कष्ट मिटाएँ //38.//


मनचाहे फल सब वो पावें

जो निशदिन हनुमत को ध्यावें //39.//


महावीर कवि, दास तुम्हारा

जन्म-जन्म प्रभु, आप सहारा //40.//


दोहा:


हर लेना संकट सभी, मंगल भक्त स्वरूप

तेरी महिमा क्या कहें, तेरे रूप अनूप



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