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Ruchika Rai

Abstract

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Ruchika Rai

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शिक्षक

शिक्षक

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गुमनामी के घने अँधेरे से बाहर लेकर आते,

एक नए अंदाज से है हमारी पहचान कराते,

स्वयं के अंदर कितनी क्षमता है रूबरू करवा,

हमें रोशनी में आने के काबिल हैं बनाते।


सही गलत में भेद करना है हमको बतलाये,

प्रगति पथ पर चलने के काबिल हमें बनाये,

हमें तराश कर सदा ही इस काबिल बनाते,

हम स्वाभिमान संग जीवन में आगे बढ़ पाये।


कुम्हार की तरह थाप कर हमें आकार देते,

हमारे ज्ञान को सदा ही वह उचित विस्तार देते,

जीवन मूल्यों को थाम कर कैसे आगे बढ़े हम,

हमारी छवि को वह सदा ही प्रसार देते।


हमें नीम अँधेरे से निकाल कर रोशनी दिखाते,

हमारे हौसलों को वह मजबूत कर जाते,

गुरू बिना जीवन का अस्तित्व निरर्थक होता,

गुरू ही ज्ञान और विज्ञान की बातें हमें समझाते।



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