STORYMIRROR

Dr. Akansha Rupa chachra

Inspirational

3  

Dr. Akansha Rupa chachra

Inspirational

शीर्षक- शुभ कर्मो का संचयन

शीर्षक- शुभ कर्मो का संचयन

1 min
402

गिरते संभलते कदमों को कैसे संभाला जाए तेरे बिन

कर्मों की गठरी सिर पर लेकर स्वांस भागता जाए।

आवागमन की चक्की चलती युग युग पीसते जाए।

मानव आया करने क्या तू, माया रंग जब चढ़ा गहरा

ईश्वर ही भूला जाए क्यों प्राणी पल पल पाप कमाये।


माया, लोभ, ईष्या परम शत्रु काहे मन भरमाये।

आया खाली हाथ रे मानव , साथ भी कुछ न जाए।

स्वांसो का ताना बाना लेखा कर कर्मों का अपने।

बस शुभ-अशुभ कर्मों की गठरी भरता जाए।


कुछ घटता कुछ बढ़ता लेकिन स्वांस ही घटता जाए।

कर लो नेक कमाई, मिट्टी के तन से.....

हाड-मास का पुतला शरीर....पंचतत्व के मेल से

कर लो नेक कमाई, परोपकारी बन शांति का अनुभव पाये।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational