शीर्षक:पत्थर की खोजती निगाहें…
शीर्षक:पत्थर की खोजती निगाहें…
इन पत्थरों को भी तो ज़रा गोर से देखो
कठोर होते हैं पर चाह कुछ तो रखते है
कलम उठा कर कुछ लिख पाना भी हैं
इन पत्थरों की किस्मत में कहां कुछ है
कागज पर पत्थर की पीड़ा को उकेरना हैं
तो पत्थर के समीप पहुँचना हैं
पत्थर की खोजती निगाहें…
पत्थर को तराश भगवान बना दिया जाता हैं
निगाहे अगर तराशने वाले कि गर पड़ जाए
उसके सपनो की लिखावट को क्यो न उकेरा जाए
उनके जज्बात को भी रंग दिया जाए
देखना अमिट छाप रह जाए तराशने वाले की
कभी पत्थर सिर्फ पत्थर नही रह जायेगा
पत्थर की खोजती निगाहें…
सभी को नतमस्तक होने को मजबूर कर जाएगा
उसके दबे जज्बात यदि उकेरे जाए
तो पत्थर में भी मूरत पालनहार की नजर आएगी
भावनाएं जब किसी कारीगर की उस पर पड़ जाएगी
लकीरे उकेर देने से ही सूरत उसकी बदल जाएगी
एक निगाह यदि उस पर पड़ जाएगी
पत्थर की खोजती निगाहें…
फिर वह पत्थर नही कहलायेगा
यही समाधान जब हो जाएगा
फिर कहाँ वह सिर्फ पत्थर रह जाएगा
कारीगर की कल्पना जब भी उससे मिल जाएगी
फिर सिर्फ पत्थर नही सूरत उसकी बदल जायेगी
सूरत बदल जाए..!!!
पत्थर की खोजती निगाहें…
