"शांति"
"शांति"
शांति बाहर नहीं पगले!
यह तो अंदर की बात है।
बाहर तो कोलाहल है,
रंजिश है, कोरा विवाद है।
शांति चाहते हो तो,
अपने को समेटो।
आत्म स्वरूप को पहचानो,
अलौकिक से भेंटो।
वह विराट सत्ता,
सब में समाहित है।
अंश है हम उसके,
वो ही संवाहक है।।
