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Khushi Gupta

Tragedy

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Khushi Gupta

Tragedy

श !!!....... बच्चा सो रहा है

श !!!....... बच्चा सो रहा है

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श !!!....... बच्चा सो रहा है , 

अभी न करो तकरार, 

अब न गिनाओ कि तुमने 

मुझ पर और मेरे मायके वालों पर किए हैं कितने एहसान

अभी मत बताओ कि मैं 

कितनी बुरी पत्नी हूँ 

और मेरा घर चलाने का तरीका और मेरा पकाया हुआ खाना 

तुम्हें कितना नागवारा है?

श्श्श् ! ! ! ...कहा न श्श्श् ! ... बच्चा सो रहा है, 

इसलिए अभी तो मत गिनाओ 

वो छोटी- छोटी आजादियाँ 

जो तुमने मुझे दे रखी हैं 

वैसे घर में सांस लेने 

खाने, पीने और सोने का हक तो तुम्हारे कुत्ते को भी है 

और नौकर को भी है!


अब मत याद दिलाओ कि 

तुम्हारी माँ मुझसे 

कितनी नफरत करती है 

और तुम कैसे 

मेरी उनके सामने तरफदारी करते हो

क्यूँकि तुम्हारी 

तरफदारी तो देखी है मैने , 

जब तुम्हारी माँ मुझे 

भद्दी गालियों से जलील करती है और तुम कमरे से चुपचाप निकल जाते हो। 

श्श्श् ! ! .....बच्चा सो रहा है ..., 

अभी करो न शोर फटकारो , धमकियों और भद्दी गालियों का

क्यूँकि ये शोर 

अक्सर घर के बरामदे से 

निकल कर गूँजता है 

पूरे मोहल्ले में

और जब गली की औरतें 

पूँछती है मुझसे 

इस बारे में 

तो मुझे तुम्हें बचाना पड़ता है, 

तुम्हारी घटिया सोच को सबकी निगाहों में आने से 

बचाना पड़ता है क्यूँ ?

इसका तो मुझे पता नहीं 

शायद इसलिए कि तुम!

मेरे पति हो..., 

खैर छोड़ो , 

और बच्चा, बच्चा तो बगल के घर में नहीं 

यहीं मेरी गोद में लेटा है , 

मै नहीं चाहती 

इसके कानों में 

तुम्हारी दी गई गालियाँ गूंजे

या फिर इसे तुम पर मेरे

किए गए एहसान मालूम चले

क्यूंकि न ही मैं इसे

तुम्हारे जैसा दरिंदा बनाना चाहती हुँ और न ही अपने जैसी डरपोक । 

श ! ! .... बच्चा सो रहा है ....



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