Kalpesh Kalpesh
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ये रंगीन फसाना कोई मुझसे पूछेके तू कैसा प्यारा है कितना हंसी हैसबा से ये कह दो के कलियां बिछाएवो देखो, वो जान-ए-बहार आ रहा है
सबा से ये कह दो
शिक्षा
मिश्रा
कहना है
सबा
और तू" ...
मेनका
कविता
संगम
सूजज
कुछ दर्द चिल्ला उठे थे पिछले बरस में अबके साल खुशियों की कविताएँ गाएंगे। कुछ दर्द चिल्ला उठे थे पिछले बरस में अबके साल खुशियों की कविताएँ गाएंगे।
जिंदगी ख्वाबों से बन्धी होती है, ख्वाब हमारे जीने की चाहत। जिंदगी ख्वाबों से बन्धी होती है, ख्वाब हमारे जीने की चाहत।
चाहे कड़वे हो या हल्के मीठे उन्हें चांदी सा वर्क नहीं लगाऊंगा, चाहे कड़वे हो या हल्के मीठे उन्हें चांदी सा वर्क नहीं लगाऊंगा,
कैसे कह दूं मैं इन्सान नहीं, जब हर शब्दों पर मंथन करता हूं! कैसे कह दूं मैं इन्सान नहीं, जब हर शब्दों पर मंथन करता हूं!
मदमस्त बना होता है, मनु! कहता है, वत्सर है नूतन॥ मदमस्त बना होता है, मनु! कहता है, वत्सर है नूतन॥
जिंदगी उस आस सी जो कहीं तो है मचलती! जिंदगी उस आस सी जो कहीं तो है मचलती!
इस गुजरते साल से , देखो ! हमने कितना कुछ सीख लिया। इस गुजरते साल से , देखो ! हमने कितना कुछ सीख लिया।
बच पाऊँगी तब ही तो मैं भी, तेरे किए प्रयास से। बच पाऊँगी तब ही तो मैं भी, तेरे किए प्रयास से।
बदला ज़माना,बदली फ़िजा बीता 2020 आया 2021। बदला ज़माना,बदली फ़िजा बीता 2020 आया 2021।
कोरोना का साल(2020) गुजरने वाला है शायद अब ठहरा वक्त भी चलने वाला है। कोरोना का साल(2020) गुजरने वाला है शायद अब ठहरा वक्त भी चलने वाला है।
जा रहा हूँ, मैं हूँ साल दो हज़ार बीस। जा रहा हूँ, मैं हूँ साल दो हज़ार बीस।
हर तरफ सिर्फ खुशियां छाएं, 2021 हमें ऐसे सुंदर दिन दिखाए। हर तरफ सिर्फ खुशियां छाएं, 2021 हमें ऐसे सुंदर दिन दिखाए।
मैं भी तलाश रही हूँ एक गर्म कोना, जहाँ महफूज़ रख सकूँ अपने जज़्बात। मैं भी तलाश रही हूँ एक गर्म कोना, जहाँ महफूज़ रख सकूँ अपने जज़्बात।
नई सुबह है नव जागरण प्रसन्न मन। नई सुबह है नव जागरण प्रसन्न मन।
बहुत कुछ मिल भी गया बहुत कुछ का अभाव भी रहा। बहुत कुछ मिल भी गया बहुत कुछ का अभाव भी रहा।
नये वर्ष में, नया सूर्य है नई भोर में, नई किरण है नये वर्ष में, नया सूर्य है नई भोर में, नई किरण है
मेरे दोस्त जो दूर दूर जाके बैठ गये है उन सबसे मुलाकात हो जाये अबके बरस। मेरे दोस्त जो दूर दूर जाके बैठ गये है उन सबसे मुलाकात हो जाये अबके बरस।
तेरे अक्स को अपने कमरे की दीवार पर महसूस करती है। तेरे अक्स को अपने कमरे की दीवार पर महसूस करती है।
वो देखो पहाड़ी के पीछे से अम्बर में एक चमकती नदी सी आ रही है। वो देखो पहाड़ी के पीछे से अम्बर में एक चमकती नदी सी आ रही है।
मुहब्बत से कभी देखा नहीं है! जाने क्यूं वो होता अपना नहीं है। मुहब्बत से कभी देखा नहीं है! जाने क्यूं वो होता अपना नहीं है।