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Pawanesh Thakurathi

Abstract

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Pawanesh Thakurathi

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सैनिक की चाह

सैनिक की चाह

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वतन की खुश्बू, वतन की मिट्टी

सदा ही मेरे साथ रहे।


जब मैं जाऊं ये जहाँ छोड़कर,


तब माँ भारती का नाम होठों पर

और तिरंगा मेरे हाथ रहे।


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