सागर
सागर
तलाश है मुझे उस शाम की
जिसमे तू मैं और ख़ामोशी हो
जिसमे तेरी आँखों से मुझे अपलक निहारना हो
और मेरी नजरें शर्म के मारे नीची हो....
उफ़ फिर दिल का धड़कना हो....
फिर निगाहो से बाते हो....
बात नहीं जुबान से बल्कि सिर्फ इशारे हो.....
तलाश है मुझे उस शाम की
जहां तू हो मैं हूँ और शांत सागर की लहरें हों....
कुछ उन लहरों का शोर हो....
कुछ मेरे दिल हाल हो....

