STORYMIRROR

chanchal jaiswal

Abstract

3  

chanchal jaiswal

Abstract

ऋतु का आगम

ऋतु का आगम

1 min
239

उसने माथा चूम लिया था

धूप खिली थी आँखों में

और अधर का फूल खिला था

ख़ामोशी संदल संदल थी


मन में क्याकुछ बीज दिया था

और सजल से नेह नयन ने

रोम-रोम मृदु सींच दिया था

बाँध लिया था गगनपाश में


रंगों में उन्मुक्त किया था

उष्मित माटी गीली गीली

मौसम यों अनुकूल मिला था

भाव बीज का मुकुलित होना


सपनों का दूकूल मिला था

उसने माथा चूम लिया था

अपनापन भरपूर मिला था

या फिर था मैं मिला स्वयं से

दर्पण ऐसा खिला-खिला था।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract