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Ayush Jain

Abstract

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Ayush Jain

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रोज़ तुमसे प्यार होता है

रोज़ तुमसे प्यार होता है

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जब हर सुबह देखता हूं

तुझे अपने सिरहाने,

मेरी बाज़ुओं को अपना

तकिया बनाते किसी बहाने,

तब तब तुमसे प्यार होता है,

कुछ और कुछ और।


जब तू गीले बाल झटके, उन्हें सुखाए,

चाय बनाकर धीमे से

हिलाए मुझे उठाए,

तब तब तुमसे प्यार होता है,

कुछ और कुछ और।


जब तू शांति से सुबह की

भागदौड़ कर जाए,

सबका नाश्ता,

मेरा टिफ़िन बनाए,

तब तब तुमसे प्यार होता है,

कुछ और कुछ और।


जब तू दिनभर जॉब करके

भी घर संभाले,

जॉब पे बॉस होकर भी

घर पे गृहणी हो जाए,

तब तब तुमसे प्यार होता है,

कुछ और कुछ और।


जब तू खुद थककर भी

मेरी थकान मिटाए,

मैं सो जाऊं और घर

समेट कर फिर तू सोने आए,

तब तब तुमसे प्यार होता है,

कुछ और कुछ और।


अपने रिश्तों को ताक पे रख,

मेरा हर रिश्ता निभाए।

अपने हर दुख भी भूल,

मेरी खुशियां बन जाए।


अपनी पूरी ज़िन्दगी

मेरे परिवार के नाम कर,

कुछ न किया हो ऐसा जताए,

तब तुमसे प्यार होता है,

कुछ और कुछ और।


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