Shraddhaben Kantilal Parmar
Classics Inspirational Thriller
बिखर रहे हैं जिंदगी के रंग
और तुम कहा हो...?
प्यार के रंग में रंगे थे हम
आज बेरंग जिंदगी क्यों हो गई है...?
हँसी की गूंज सुनाई दे रही थी जो कल तक
आज मायूसी क्यों छाई है...?
बहुत सारे सवालों दिमाग में घूम रहे हैं
ए जिंदगी तू कहाँ है..?
हिन्दी दिवस
मेरी मिट्टी म...
वंदे मातरम्
वतन
कलम की रफ़्ता...
तेरी यादों की...
मुस्कुराने की...
बचपन
बारिश
फिर ये चेहरे पर तुम्हारे कैसा तनाव दिख रहा हैं.. फिर ये चेहरे पर तुम्हारे कैसा तनाव दिख रहा हैं..
मेरे घरवालों को खबर करना, कोई गर डूबता दिखाई दे। मेरे घरवालों को खबर करना, कोई गर डूबता दिखाई दे।
किसी असहायों का सहारा बनना और सबके हित में सोचना ही तो धर्म का मर्म है। किसी असहायों का सहारा बनना और सबके हित में सोचना ही तो धर्म का मर्म है।
खुद से बगावत ही समझिए, तभी तो रोजाना खर्च हो रहा हूं थोड़ा थोड़ा। खुद से बगावत ही समझिए, तभी तो रोजाना खर्च हो रहा हूं थोड़ा थोड़ा।
प्रकृति प्रेमी है, आत्मनिर्भर भारत का संदेशवाहक है यह थैला।। प्रकृति प्रेमी है, आत्मनिर्भर भारत का संदेशवाहक है यह थैला।।
प्रेम निर्मल भावों से, अखंड ज्योत जलाता है। प्रेम के उपवन में मन सुमन बन जाता है। प्रेम निर्मल भावों से, अखंड ज्योत जलाता है। प्रेम के उपवन में मन सुमन बन जा...
सिद्ध करें चलो समर्पण अपना उतरे दरिया पार। सिद्ध करें चलो समर्पण अपना उतरे दरिया पार।
लेता हूॅं इसलिये मैं जानम हरदमही आसरा तुम्हारा ! लेता हूॅं इसलिये मैं जानम हरदमही आसरा तुम्हारा !
सुखद या दुखद अज्ञात ही है आज ज्ञात नींव आने बाले कल की। सुखद या दुखद अज्ञात ही है आज ज्ञात नींव आने बाले कल की।
गर्व से अब भी कहते हैं वो बचपन के दिन न्यारे थे। गर्व से अब भी कहते हैं वो बचपन के दिन न्यारे थे।
आम आदमी जीये कैसे, उसकी न कुछ समझ में आये ये सब हम क्यों कहते हैं, कोई तो मुझको बतलाये। आम आदमी जीये कैसे, उसकी न कुछ समझ में आये ये सब हम क्यों कहते हैं, कोई तो मुझ...
कुछ फुरसत के पल निकालिये, कभी खुद से भी मिला कीजिये कुछ फुरसत के पल निकालिये, कभी खुद से भी मिला कीजिये
मौत तय है ये सच है मगर याद रख जीने से पहले हरगिज़ तू मरना नहीं। मौत तय है ये सच है मगर याद रख जीने से पहले हरगिज़ तू मरना नहीं।
मैं तेरे हाथ देखता ही रहा हाथ देखा घड़ी को भूल गया। मैं तेरे हाथ देखता ही रहा हाथ देखा घड़ी को भूल गया।
पढ़ लिख कर घर में रहे तो क्यों इतने साल और पैसे क्यों खोए ? पढ़ लिख कर घर में रहे तो क्यों इतने साल और पैसे क्यों खोए ?
पर आज भी दिल में यादें बसी है उन पलों कीI पर आज भी दिल में यादें बसी है उन पलों कीI
योग के यही चार मार्ग किसी का भी भान ले जब मन का द्वंद्व खत्म मंजिल पर तू उड़ान। योग के यही चार मार्ग किसी का भी भान ले जब मन का द्वंद्व खत्म मंजिल पर त...
आखिरी दिन में उसकी हां से मेरा प्यार जीत गया। आखिरी दिन में उसकी हां से मेरा प्यार जीत गया।
बॉस मुझसे तंग था और नौकरी से तंग था मैं। बॉस मुझसे तंग था और नौकरी से तंग था मैं।
नींद का असर है आंखों पर, ख्वाब टूटे तो सच से मिलना। नींद का असर है आंखों पर, ख्वाब टूटे तो सच से मिलना।