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Dr. Akansha Rupa chachra

Abstract

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Dr. Akansha Rupa chachra

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रक्षाबंधन

रक्षाबंधन

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सावन की फुहार भाई-बहन की

आस्था और विश्वास का त्योहार

बहनो की याद प्यार का अहसास

खट्टी मीठी यादो का सफर

भाई - बहन का रिश्ता भावनाओ 

की जमा पूंजी स्मृतियो की गुल्लक

संजो कर रखे पल बड़े याद आते हैं ।

जब बचपन पीछे छूट जाता है

जिम्मेदारियो मे त्योहार मनाते हैं

प्यारी बहने जब ससुराल मे हो और भाई

दूर प्रदेश मे नौकरी करता हो।

माँ तेरा प्यार बहुत याद आता है

तुमसे मिलने को मन तडपता है

तेरे आँचल को एक पल नही छोडते थे।

तेरी गोद मे लेट कर हम खुली आँखों से सपने

बुनते थे।

प्यारी बहन.......

पापा तेरी कच्ची पक्की रोटियो को अमृत समझ के

खाते,मेरी नादानियो को चुटकी बजाकर

माँ के गुस्से से बचा लेती थी, ,

तेरा प्यार बेशुमार , मुझे बचपन के मीठे पल बहुत याद आते है।

मनपसंद खाना,मस्ती मे रहना, अलहड सा बचपन

रेशमी अहसासों से पली बडी , ना जो नखरों वाली

बहना तुझे चिढाने मे मजा आता था।

हमारे जिगर का टुकड़ा पापा की शहजादी,

माँ की परी मेरी आँखो का तारा

मेरी परियो की शहजादी

राखी रेशम की कच्ची डोर पक्के विश्वास का

बंधन दिल से दिल साथ है।

भगवान करे विश्व की सभी बहने सुखी रहे ।

अपने भाईयो की मंगलकामनाओ के साथ अपने

भाईयो की कलाई पर रेशम की डोरी सजाती रहे।

समाज मे किसी की कलाई सूनी न हो।

हर बहन हिफाजत से , गर्व से सिर उठा के जिये।



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