रहस्य
रहस्य
यात्रा के दौरान
देखे कई प्रासाद
कुछ प्रासाद अपनी कहानी
कहता हुआ प्रतीत हुआ
तो कुछ की दीवारों में
कैद कितने राज लगे
प्रासाद के झरोखे से
झाँकती हवा पुरवाई
अंदर दरवाजों में
छुपा रहस्य
हर ईंट की अपनी बयानी
काश बाँट ले कोई
उन सदियों की दबी कहानी
कभी राजदरबार
सजा करता था
राजा के जूतों की चरमराहट
वहाँ पर्दे के पीछे की
साजिशें
सचेत सैनिक की आँखे
कभी बजते होगें
खुशियों के नगाड़े
नृत्यांगना नृत्य
करती होंगी
पर इन सबसे भी
कुछ अलग होगा
जो हम नहीं जानते
प्रासाद एक
अबूझ पहेली भी
कई सपना, कितने ख़्वाब
पूरे हुए या टूटे
कौन बताये
किसे पता ?
हम जितना जानते हैं
उससे भी ज्यादा रहस्य वहाँ !
