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BINDESH KUMAR JHA

Romance Classics Others

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BINDESH KUMAR JHA

Romance Classics Others

रात का खोया आशिक

रात का खोया आशिक

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कोई तो जागता होगा

रात भर,

सूरज को थामे

सुबह तक मगर।

यूँ ही चाँद की

चाँदनी

बाकी नहीं रहती,

तारों से अपनी कहानी

खुलकर यूँ ही नहीं कहती।

क्या हो अगर वह

सो गया,

या फिर

काले आसमान में खो गया?

क्या चाँद चाँदनी

ला पाएगा?

क्या आसमान में

वह सफ़ेद दिया जल पाएगा?

लेकिन हमें क्या

मतलब फूल से,

जब हमने खुशबू

को सहलाया भी

अगर धूल से।

बिंदेश कुमार झा 


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