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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

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रास्ता

रास्ता

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इक कदम जो बढ़ चला

तो थम न जाए कहीं


दूर मंजिल भले ही हो

रास्ता तो साथ है


चलते रहो मैं साथ हूँ

रास्ता यह कह रहा


सब छोड़ दें साथ तो भी क्या

मैं तो अब भी साथ चल रहा।


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