राष्ट्रप्रेम गीत (33)
राष्ट्रप्रेम गीत (33)
नीति बदल गई मेरे देश की ,
तुम गफलत में न रहना ।
जो तुम आए धरा पे हमारी ,
फिर अब कोई बचेगा ना ।।
खातिर दारी बहुत करी हम ,
चाल चले तुम समझे ना ।
किये कर्म का फल पाओगे ,
हमरे दिल में जगह अब ना ।।
बच्चों की शैतानी समझ हम ,
बैठे रहे तुम समझे ना ।
आओ लड़ो अब सामने बेटा ,
हम ललकारें भगो अब ना ।।
नमक हमारे देश का खाया ,
हमको आंख दिखाओ ना ।
अब खाने को हम ना देंगे ,
भूके मरोगे समझे ना ।।
पीठ छुरा तुम हमरी भोंका ,
अब तुम कोई भाई हो ना ।
खतम हुआ है आज से रिश्ता ,
अब तुम देखो दुश्मना ।।
