राखी की थाल...
राखी की थाल...
थाल सजा कर तिलक लगा
तुझको रक्षा सूत्र मैं बांधती हूं
मेरे भैय्या तेरी लंबी उम्र के लिए
ईश्वर से सदा दुआएं मांगती हूं।
रंग बिरंगे इन धागों को भैय्या
तू महज एक डोर न समझना
नेह बंधी इस डोर से मेरी
तू इसे सदा अनमोल समझना।।
भाई बहन का बंधन है ये
युग युग तक यूं ही रहेगा
गम न हो, न आंखों में आंसू तेरे
ये प्यार यूं ही बरसता रहेगा।
पग पग पर तू साथ ही रहना
पराया कभी न खुद से करना
दुखों से कभी भर जाऊं तो
ढाल तू सदा मेरी बनना।।
कदमों में हो तेरी ढेरों खुशियां
व्यवधान न हो कोई जीवन में
बढ़ते जाए तू सदा हमेशा
बस यही कामना है मेरे मन में।
भैय्या कर एक वादा मुझसे
ना आंच तू मुझपे आने देगा
सपनों की उड़ान भर सकूं मैं
वो पंख मुझे तू लाकर देगा।।
एक दूजे की फिक्र हमेशा
एक दूजे का ख्याल रखेंगे,
नोक झोंक भले हो जीवन में
स्नेह से हम सदा बंधे रहेंगे।
ढेरो उपहार सौगातों संग मैं
तुझसे ही तो पाऊंगी...!
राखी की थाल सजा के भैय्या
तिलक माथे तेरे लगाऊंगी।।
