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Trupti Patel

Romance

4  

Trupti Patel

Romance

प्यार के रंग

प्यार के रंग

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निखर गई मे तो तेरे प्यार के रंग में,

कुछ संवर गई मे तेरे प्यार के रंग में।


खिला खिला लगता है अब सारा जहाँ,

मस्ती छाई हुई हे तेरे प्यार के रंग में।


अच्छे लगने लगे हे ये पहाड़ और नदिया,

बहेती गई हूं में तो तेरे प्यारके रंग में।


अब नही चढ़ता मुजपे रंग कोई दूजा,

में तो निखर गई तेरे प्यार के रंग में।


ये बहार, ये कलिया, ये गुलशन खिला है,

पर में तो खिली हू तेरे प्यार के रंग में।


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